Pregnancy and Parenting tips in Hindi

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Mar 2, 2019

Pregnancy Month by Month

Pregnancy Month by Month in Hindi

हर महिला के लिए मां बनने की खुशी सबसे अनमोल खुशी होती है। जैसे ही एक महिला गर्भधारण करती है तो उसे शिशु के इस दुनिया में आने की उत्सुकता काफी बढ़ जाती है। प्रेगनेंसी के इन नौ महीनों में महिला के शरीर में काफी बदलाव होते हैं। गर्भ में बच्चे का विकास जिस तरह होना शुरू होता है इसी के साथ-साथ तमाम तरह के शारीरिक बदलाव होते हैं। महीने दर महीने (pregnancy month by month baby growth in Hindi) होने वाले गर्भ में बच्चे के विकास (Fetal development in Hindi) को मां पूरी तरह अनुभव करती है और गर्भावस्था की सबसे सुखद यात्रा का सुखद अनुभव लेती है। भले ही इन नौ महीनों में महिला काफी सारी शारीरिक तकलीफों से भी गुज़रती है लेकिन शिशु का इस दुनिया में आना और उसका पहला स्पर्श पाना मां के लिए इन तमाम तकलीफों को कम कर देता है। लेकिन जब शिशु गर्भ में होता है तो हर मां को इस बात के जानने की काफी उत्सुकता रहती है कि अब मेरा शिशु कितना बड़ा हो गया होगा, अब उसके किस अंग का विकास हुआ होगा, अब शिशु क्या-क्या महसूस कर सकता है आदि। गर्भ में बच्चे के विकास को अंग्रेजी में फीटल डवलप्मेंट (Fetal development) कहा जाता है। शिशु के विकास की इस प्रक्रिया को महीने दर महीने के हिसाब से आप अच्छी तरह समझ सकती हैं। आज हम इस ब्लॉग में आपको हर महीने के हिसाब से गर्भ में बच्चे का विकास की प्रतिक्रिया बताएंगे !




    pregnancy month by month baby growth in Hindi


    पहले महीने के दौरान गर्भ में बच्चे का विकास कैसे होता है?


    गर्भावस्था का पहला महीना ऐसा होता है जिसमें खुद महिला को ही नहीं पता होता कि वो गर्भवती है। लेकिन बच्चे के इस विकास की प्रक्रिया आपके आखिरी मासिक धर्म (पीरियड्स) के खत्म होने के पहले दिन से ही शुरू हो जाती है। इस दौरान गर्भाशय में एम्नियोटिक थैली (Amniotic sac in Hindi) का निर्माण होता है जो गर्भधारण के समय बनती है। इसी में ही शिशु का विकास होता है और पहली तिमाही में यहीं पर ही प्लेसेंटा (placenta in Hindi) भी बनती है। आपको बता दें कि प्लेसेंटा गोल और चपटी नाल है जिसके ज़रिए मां के पोषक तत्व शिशु तक पहुंचते हैं और बच्चे का मल भी इसी के ज़रिये बाहर निकलता हैं।
    • पहले महीने में शिशु के अंगों का विकास (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • इस दौरान बच्चे की आंख से शुरुआत होकर उसका मुंह, जबड़ा और गले का विकास होने लगता है।
      • पहले महीने में शिशु का आंतरिक विकास (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • गर्भावस्था के पहले महीने में शिशु की रक्त कोशिकाएं (blood cells in Hindi) और रक्त संचार शुरू होने लगता है।
    • पहले महीने में शिशु का आकार (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • गर्भावस्था के पहले महीने में आपका बच्चा बिल्कुल चावल के दाने के आकार का होता है।
      • गर्भावस्था के पहले महीने के अंत तक अब आपका शिशु 6 से 7 मिमी. (1/4 इंच) लंबा हो जाता है।

    गर्भावस्था के दूसरे महीने में बच्चे का विकास 

    • दूसरे महीने में शिशु के अंगों का विकास (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • गर्भावस्था के दूसरे महीने में शिशु के चहरे के साथ-साथ उसके कान बनने शुरू होंगे।
      • हाथों के स्थान पर अब उभार आने शुरू हो जाते हैं।
      • पैर और पैरों की उंगलियां बनने की भी शुरुआत हो जाती है।
    • दूसरे महीने में शिशु का आंतरिक विकास (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • शिशु का मस्तिष्क, नर्वस सिस्टम, पाचन तंत्र, रीढ़ की हड्डी आदि इस महीने में विकसित होते हैं।
      • जो हड्डियां नरम होती हैं, इस महीने में वो कड़ी होनी शुरू हो जाती हैं।
      • इसके अलावा आपको दूसरे महीने के आखिरी चरण तक अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) में फीटल पोल (fetal pole) भी नज़र आएगा।
    • दूसरे महीने में शिशु की हलचल (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • शिशु हलचल करना शुरू कर देता है लेकिन बच्चे के लात मारने की हलचल को मां महसूस नहीं कर पाती।
    • दूसरे महीने में शिशु का आकार (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • दूसरे महीने के अंत तक आपका शिशु लगभग 2.54 सेमी (एक इंच) लंबा और गर्भ में बच्चे का वज़न लगभग 9.54 ग्राम हो जाता है।

    गर्भावस्था के तीसरे महीने में बच्चे का विकास 

    • तीसरे महीने में शिशु के अंगों का विकास (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • गर्भावस्था के तीसरे महीने के खत्म होने तक आपके शिशु के अंग पूरी तरह विकसित हो चुके होते हैं।
      • तीसरे महीने तक शिशु के हाथ, पैर, पैरों की उंगलियां पूरी तरह बन चुकी होती हैं।
      • इस महीने उसके दांत बनने शुरू हो जाते हैं।
      • उसके बाहर के कान और नाखून भी बन चुके होते हैं।
      • इसके अलावा शिशु के गुप्त अंग भी विकसित होने शुरू हो जाते हैं लेकिन इस महीने में शिशु के लिंग का पता नहीं लगाया जा सकता।
    • तीसरे महीने में शिशु का आंतरिक विकास (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • शिशु के शरीर में नसें बन चुकी हैं और पेशाब करने का रास्ता भी बन चुका है।
    • तीसरे महीने में शिशु की हलचल (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • शिशु अब अपनी मुट्ठी को खोल बंद कर सकता है।
    • तीसरे महीने में शिशु का आकार (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • तीसरे महीने के अंत तक आपका शिशु 7.6 से 10 सेमी (करीब 4 इंच) तक लंबा होगा और गर्भ में बच्चे का वज़न करीब 28 ग्राम हो जाता है।

    गर्भावस्था के चौथे महीने में बच्चे का विकास 


    अब गर्भावस्था का चौथा महीना यानी दूसरी तिमाही की शुरुआत हो चुकी है। इस महीने तक आपके बच्चे का काफी विकास हो चुका होता है।
    • चौथे महीने में शिशु के अंगों का विकास (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • इस महीने में शिशु की पलकें, आइब्रो, नाखूनों का विकास होने लगता है।
      • वहीं शिशु के गुप्त अंग भी अच्छी तरह विकसित हो जाते हैं।
      • इस महीने में आप चाहें तो डॉप्लर की सहायता से शिशु की दिल धड़कनें भी सुन सकती हैं - डॉप्लर अल्ट्रासाउंड (Doppler scan) स्कैन का ही एक प्रकार है जिससे गर्भ में शिशु के स्वास्थ्य का पता लगाया जाता है, इसके ज़रिए आप शिशु के दिल की धड़कन (baby ki heartbeat) भी सुन सकती हैं।
    • चौथे महीने में शिशु की हलचल (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • इसके अलावा अब बच्चा अंगूठा चूस सकता है, अंगड़ाई ले सकता है और उबासी भी ले सकता है
    • चौथे महीने में शिशु का आकार (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • महीने के अंत तक शिशु छह इंच लंबा (15 सेमी.) और गर्भ में बच्चे का वज़न 112 ग्राम हो जाता है।

    गर्भावस्था के पांचवे महीने में बच्चे का विकास 

    • पांचवे महीने में शिशु के अंगों का विकास (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • गर्भावस्था के पांचवे महीने में शिशु के सिर पर बाल और कंधे, पीठ और माथे पर पतले और मुलायम बाल आने लगते हैं जो बच्चे की रक्षा करते हैं। जन्म के एक सप्ताह बाद ही ये बाल झड़ना शुरू हो जाते हैं।
      • इसके अलावा शिशु की त्वचा पर एक सफेद परत आ जाती है जिसे वर्निक्स कैसेओस (vernix caseosa in Hindi) कहा जाता है। यह परत शिशु की रक्षा उस समय करती है जब जन्म से पहले एम्नियोटिक द्रव (amniotic fluid) धीरे-धीेर खत्म होने लगता है।
    • पांचवे महीने में शिशु का आंतरिक विकास (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • इस महीने में शिशु की मांसपेशियां विकसित हो चुकी होती हैं।
    • पांचवे महीने में शिशु की हलचल (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • यही वो महीना है जिसमें आप अपने शिशु की हलचल महसूस करना शुरू कर देती हैं। अब शिशु अंगड़ाइयां लेना शुरू कर देता है।
    • पांचवे महीने में शिशु का आकार (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • गर्भावस्था के पांचवे महीने के अंत तक शिशु 25 सेमी. (10 इंच) लंबा हो जाता है और गर्भ में बच्चे का वज़न लगभग 400 ग्राम हो जाता है।

    गर्भावस्था के छठे महीने में बच्चे का विकास 

    • छठे महीने में शिशु के अंगों का विकास (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • इस महीने में शिशु की त्वचा लाल रंग की हो जाती है और वह झुर्रीदार हो जाती है।
      • पारदर्शी त्वचा पर नसें साफ नज़र आने लगती हैं।
      • अब शिशु के हाथों और पैरों की उंगलियों पर निशान (फिंगर प्रिंट्स - finger prints in Hindi) बनने लगते हैं।
    • छठे महीने में शिशु की हलचल (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • अब उसकी आंखें खुलने लगती हैं।
      • इस महीने में शिशु की हलचल बढ़ जाती है और वो हिचकियां भी ले सकता हैं।
      • शिशु के हिचकियां लेने पर आपको पेट में झटके का अहसास हो सकता है।
      • सोनोग्राफी के ज़रिये आप बच्चे की हलचल देख पाएंगी।
    • छठे महीने में शिशु का आकार (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • गर्भावस्था का छठा महीना यानी दूसरी तिमाही का आखिरी महीना जिसमें आपका शिशु 30 सेमी. लंबा (12 इंच) और अब गर्भ में बच्चे का वज़न करीब एक किलो हो जाता है।

    गर्भावस्था के सातवें महीने में बच्चे का विकास 

    • सातवें महीने में शिशु का आंतरिक विकास
      • गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में शिशु के शरीर में वसा (फैट) बननी शुरू हो जाती है।
    • सातवें महीने में शिशु की हलचल
      • इस महीने में आपका शिशु करवट ले सकता है और अब उसके सुनने की क्षमता विकसित हो चुकी है। इस महीने में शिशु बाहर की आवाज़ों और रोशनी होने पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकता है
    • सातवें महीने में शिशु का आकार
      • इस दौरान बच्चा 36 सेमी. (14 इंच) लंबा और गर्भ में बच्चे का वज़न एक से दो किलो का हो सकता है।

    गर्भावस्था के आठवें महीने में बच्चे का विकास 

    • आठवें महीने में शिशु के अंगों का विकास (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • उसके अंदर के अंगों का विकास हो चुका है लेकिन अभी भी फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हुए हैं
    • आठवें महीने में शिशु का आंतरिक विकास (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • इस महीने में भी शिशु में वसा (फैट) बननी जारी रहती है।
      • इस महीने में शिशु के मस्तिष्क का लगातार विकास होता है और अब उसकी देखने और सुनने की क्षमता पूरी तरह विकसित हो चुकी है।
    • आठवें महीने में शिशु की हलचल (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • इसके साथ ही इस माह में आपको शिशु का लात मारना (baby kick - baby movement in pregnancy in Hindi) भी महसूस होगी।
    इस महीने में शिशु की हलचल आपको साफ महसूस होने लगेगी। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस महीने तक शिशु का काफी हद तक विकास (गर्भ में बच्चे का विकास) हो चुका होता है और उसे गर्भ में जगह कम पड़ने लगती है। आप अल्ट्रासाउंड के ज़रिये शिशु की हरकत को देख भी सकती हैं। लेकिन आपको बता दें कि ऐसा ज़रूरी नहीं है कि शिशु हमेशा ही हलचल करता रहे। वो आराम भी करेगा। इसलिए अगर अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) में शिशु हरकत करता नज़र ना आए तो आप परेशान ना हों। हो सकता है शिशु सो रहा हो।
    • आठवें महीने में शिशु का आकार (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • आपका शिशु 46 सेमी. (18 इंच) का हो जाता है और गर्भ में बच्चे का वज़न 2.27 किलो हो जाता है।

    गर्भावस्था के नौवें महीने में बच्चे का विकास 


    गर्भावस्था का नौवा महीना शुरू हो गया है और पूरा बन चुका है, बस उसके फेफड़े विकसित होने बाकी हैं। अब ज्यादा समय नहीं है आपके शिशु के इस दुनिया में आने का।
    • नौवें महीने में शिशु की गतिविधि (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • इस महीने में शिशु अपनी पॉजिशन बदल लेता है और उसका सिर नीचे की ओर जन्म देने वाली नलिका में आ जाता है।
    • नौवें महीने में शिशु का आकार (गर्भ में बच्चे का विकास)
      • गर्भावस्था के आखिरी माह तक उसका वज़न 3.2 किलो और उसकी लंबाई 50 इंच (18 से 20 इंच) हो जाती है।

    गर्भ में शिशु का लिंग पता लगाना - लड़का है या लड़की - How to know boy or girl during pregnancy at home


    यूं तो आजकल के लोग लिंग भेद को लेकर काफी जागरुक हो गए हैं और अब लड़का और लड़की का भेद ना करके दोनों का खुले दिल से स्वागत करते हैं। लेकिन एक कड़वी सच्चाई ये भी है कि कुछ लोग वाकई में गर्भ में लड़का या लड़की के होने का पता लगाने के लिए टेस्ट करवाने की चाह रखते हैं। आपको बता दें कि गर्भ में शिशु का लिंग जानना एक कानूनी अपराध है और ऐसा करने पर आपको सज़ा भी हो सकती है। ज़रा सोचिए कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो एक संतान पाने के लिए न जाने कितनी दुआएं मांगते हैं लेकिन किन्हीं कारणों से उन्हें संतान सुख नहीं मिल पाता। ऐसे में वो बस चाहते हैं कि उन्हें किसी तरह से एक बार संतान सुख मिल जाए। ऐसे में लड़का और लड़की के बीच आज भी फर्क करने वाले लोगों को यह समझना चाहिए कि ईश्वर ने उनको बहुत सौभाग्यशाली बनाया है जो उनको जल्द ही संतान सुख मिलने वाला है, और आज लड़का और लड़की दोनों बराबर हैं। इसलिए गर्भ में शिशु के लिंग जानने की, लड़का कैसे पैदा करें आदि बातों के बारे में सोचना छोड़ें और भगवान के दिए इस वरदान का दिल खोलकर स्वागत करें। चाहे लड़का हो या लड़की, आप दोनों के लिए खुद को तैयार करें और उसके अच्छे भविष्य की योजना बनाएं। चूंकि हर मां के लिए गर्भावस्था का समय काफी खुशनुमा होता है और बच्चे की हर गतिविधि, उसके विकास को जानने की इच्छा उनमें रहती ही है। आप डॉक्टर की मदद से और अपने खुद के अनुभव से गर्भ में बच्चे का विकास महसूस कर पाएंगी। आप खुश रहें, अच्छा खानपान खाएं और गर्भावस्था के हर पल का आनंद उठाएं।

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