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Mar 6, 2019

Thyroid Problem in Pregnancy

गर्भावस्था में थायराइड की समस्या

एक प्रकार की तितली के आकार की अंत स्रावी ग्रंथि (endocrine gland) है, जो गले में होती है। यह दो इंच तक लंबी होती है और इसका भार तकरीबन आधे किलो तक होता है। थायराइड में दो प्रकार के हार्मोन यानी T3 और T4 हार्मोन होते है, जो मानव शरीर में सांस संबंधी समस्या और पाचन क्रिया में सहायक होते है। थायराइड ग्रंथि (thyroid gland) हार्मोन बनाने, उन्हें सुरक्षित रखने और नसों में छोड़ने में अहम योगदान देती है। (Thyroid Problem in Pregnancy) इसके अलावा थायराइड हार्मोन शरीर के विभिन्न अंगों को सुचारू रूप से काम करने और शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करते है।





    Thyroid Problem in Pregnancy in Hindi

    डिलीवरी के बाद थायराइड की समस्या के क्या कारण होते है?

    • यूं तो डिलीवरी के बाद थायराइड (delivery ke baad thyroid) होने के सही कारण का पता अब तक नहीं चल पाया है, लेकिन जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान या उससे पहले थायराइड की समस्या होती है, अक्सर उनमें प्रसव के बाद थायराइड की समस्या बनी रहती है।
    • प्रेगनेंसी की शुरुआत में और डिलीवरी के समय कुछ महिलाओं के शरीर में एंटी थायराइड एंटीबॉडी (anti thyroid antibody) की मात्रा बढ़ने लगती है, जिसे प्रसव के बाद थायराइड (delivery ke baad thyroid) होने का एक कारण माना जाता है।
    • इसके अलावा जिन महिलाओं में प्रसव के बाद बीमारियों से लड़ने की क्षमता घटती-बढ़ती रहती है, उनमें पहले से स्व-प्रतिरक्षित (autoimmune) थायराइड की समस्या होती है। इस परिस्थिति को हाशीमोटो रोग के समान माना जाता है। Thyroid Problem in Pregnancy
    • कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह किसी वायरस या बैक्टीरिया की वजह से होता है, वहीं कुछ डॉक्टर्स इसकी वजह रोगी के जीन्स को मानते हैं।
    • इसके अलावा प्रसव के बाद थायराइड की समस्या आयोडीन की कमी, शुगर (टाइप 1 डायबिटीज) और अवसाद की वजह से भी हो सकती है।

    प्रसव के बाद थायरायड की समस्या कब होती है?

    आमतौर पर महिलाओं को प्रसव के बाद थायराइड (delivery ke baad thyroid) की समस्या बच्चे के जन्म के करीब चार से 12 महीनों के बीच होती है। दरअसल प्रेगनेंसी के बाद लगभग चार महीनों तक महिलाओं के शरीर की प्रतिरक्षण प्रणाली उनके थायरइड ग्रंथि पर निरंतर हमला करती है, जिसकी वजह से थायराइड हार्मोन का रिसाव होता है और वह रक्त कणिकाओं में मिल जाता है। इसकी वजह से महिला के शरीर में थायराइड हार्मोन की मात्रा या तो बढ़ जाती है या फिर घट जाती है।

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    प्रसव के बाद थायराइड की समस्या के लक्षण क्या है?

    आमतौर पर थायराइड दो प्रकार के होते हैं, हाइपर थायराइड और हाइपो थायराइड। शिशु के जन्म के बाद आपको इनमें से किसी भी एक थायराइड की समस्या हो सकती हैं। महिलाओं में डिलीवरी के बाद थायराइड होने के लक्षण दिखाई देने पर आपको अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। नीचे प्रसव के बाद थायराइड (delivery ke baad thyroid) के लक्षणों को हाइपर थायराइड और हाइपो थायराइड के अंतर्गत दो भागों में विभाजित किया गया है।

    डिलीवरी के बाद हाइपर थायराइड के लक्षण क्या है?

    • वजन घटना : डिलीवरी के बाद हाइपर थायराइड (hyperthyroidism) होने का सबसे पहला लक्षण वज़न का घटना हो सकता है।
    • थकान होना : अक्सर आपको थकान हो तो यह प्रसव के बाद हाइपर थायराइड का लक्षण हो सकता है।
    • घबराहट होना : डिलीवरी के बाद हाइपर थायराइड (hyperthyroidism) होने पर अचानक घबराहट हो सकती है।
    • तेज़ धूप बर्दाश्त न कर पाना : तेज़ धूप बर्दाश्त ना कर पाना भी प्रसव के बाद हाइपर थायराइड (hyperthyroidism) का लक्षण हो सकता है।
    • ज्यादा पसीना आना : डिलीवरी के बाद हाइपर थायराइड (hyperthyroidism) की समस्या होने पर ज्यादा पसीना आ सकता है।
    • दिल की धड़कन बढ़ना : दिन के किसी भी समय अगर अचानक आपकी दिल की धड़कनें बढ़ने लगती है और आपको यह समस्या लगातार होती है तो यह प्रसव के बाद हाइपर थायराइड (hyperthyroidism) का लक्षण हो सकता है।

    डिलीवरी के बाद हाइपो थायराइड के लक्षण क्या है?

    • वजन बढ़ना : अगर शिशु के जन्म के बाद आपका वजन असामान्य रूप से बढ़ रहा है तो यह डिलीवरी के बाद हाइपो थायराइड (delivery ke baad hypothyroidism) का लक्षण हो सकता है।
    • ठंड बर्दाश्त न कर पाना : प्रेगनेंसी के बाद ठंड बर्दाश्त न कर पाने को डिलीवरी के बाद हाइपो थायराइड का लक्षण माना जा सकता है।
    • मिजाज़ बदलना : बच्चे के जन्म के बाद अगर बिना वजह आपका मिजाज़ बदल रहा है तो यह डिलीवरी के बाद हाइपो थायराइड (delivery ke baad hypothyroidism) का लक्षण हो सकता है।
    • कब्ज होना : गर्भावस्था के बाद अगर आपको कब्ज की समस्या है, तो यह प्रसव के बाद हाइपो थायराइड का लक्षण हो सकता है। Thyroid Problem in Pregnancy
    • शुष्क त्वचा होना : त्वचा का शुष्क होना भी डिलीवरी के बाद हाइपो थायराइड (delivery ke baad hypothyroidism) का संकेत हो सकता है। हालांकि शरीर में पानी की कमी होने से भी एेसा हो सकता है।
    • ज्यादा थकान होना : ज्यादा थकान होना भी डिलीवरी के बाद हाइपो थायराइड (delivery ke baad hypothyroidism) का संकेत हो सकता है।
    • बाल झड़ना : प्रेगनेंसी के बाद अचानक ज्यादा बाल झड़ना प्रसव के बाद हाइपो थायराइड (delivery ke baad hypothyroidism) का लक्षण हो सकता है।
    (नोट : ऊपर बताए गए सभी लक्षण कई अन्य समस्याओं के संकेत भी हो सकते हैं, इसीलिए इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर की सलाह लेना आपके लिए सबसे बेहतर होगा)।

    डिलीवरी के बाद थायराइड होने का पता कैसे लगाया जाता है?

    महिलाओं में डिलीवरी के बाद थायराइड (delivery ke baad thyroid) की समस्या काफी असामान्य होती है, लेकिन अगर आपको थायराइड के किसी भी लक्षण का अनुभव होता है तो आप इसका पता लगाने के लिए अपने डॉक्टर की सलाह ले सकती हैं। ज्यादातर मामलों में डॉक्टर खून की जांच करने की सलाह देते हैं। इस जांच को थायराइड प्रोफाइल टेस्ट (thyroid profile test) कहा जाता है, और लगभग सभी जांच केंद्रों में उपलब्ध होती है। यह जांच विभिन्न प्रकार के थायराइड हार्मोन्स यानी T3 और T4 हार्मोन के स्तरों का पता लगाने के लिए की जाती है। आमतौर पर डॉक्टर यह जांच महिलाओं को प्रसव के तीन से छह महीने के बाद करवाने की सलाह देते हैं। इसके अलावा खून की जांच में थायराइड हार्मोन को असंतुलित पाए जाने पर डॉक्टर आपको अल्ट्रासाउंड (ultrasound) के माध्यम से थायराइड की जांच करने की सलाह दे सकते हैं।

    डिलीवरी के बाद हाइपर थायराइड की जांच :

    प्रसव के बाद थायरायड (delivery ke baad thyroid) की जांच अल्ट्रासेंसिटिव टीएसएच (TSH) के स्तर का पता लगाकर की जाती है। जांच में अगर थायरॉक्सिन यानी T4 हार्मोन के स्तर में बढ़ोत्तरी और थायराइड स्टिम्यूलेटिंग हार्मोन (TSH / Thyroid Stimulating Hormone) का स्तर, न्यूनतम स्तर से नीचे पाया जाता है तो आपको डिलीवरी के बाद हाइपर थायरायड (delivery ke baad hyperthyroidism) हो सकता है। यदि आपको पहले ग्रेव्ज बीमारी की समस्या रही हो तो खून में थायराइड स्टिम्यूलेटिंग इम्यूनोग्लोबिन की मात्रा ज्यादा हो सकती है।

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    डिलीवरी के बाद हाइपो थायराइड की जांच :

    डिलीवरी के बाद थायराइड (delivery ke baad thyroid) की जांच में यदि आपके थायरॉक्सिन यानी T4 हार्मोन्स स्तर न्यूनतम से कम और थायराइड स्टिम्यूलेटिंग हार्मोन (TSH / Thyroid Stimulating Hormone) के स्तर में बढ़ोत्तरी पाई जाती है तो आपको डिलीवरी के बाद हाइपो थायरायड (delivery ke baad hypothyroidism) हो सकता है। इस स्थिति में आपकी पियुष ग्रंथि से अधिक टीएसएच का स्राव होता है।

    क्या प्रसव के बाद थायराइड का इलाज हो सकता है?

    हां, प्रसव के बाद थायराइड का इलाज संभव है। हालांकि डिलीवरी के बाद थायराइड (delivery ke baad thyroid) होने के करीब 12 से 18 महीनों के बाद प्रसवोत्तर हाइपर थायराइड और हाइपो थायराइड का स्तर सामान्य हो जाता है, लेकिन ऐसा न होने पर डॉक्टर थायराइड के स्तर की निगरानी करते हैं और रोग से पीड़ित महिलाओं को हर चार महीने में थायराइड प्रोफाइल टेस्ट (thyroid profile test) करने की सलाह देते हैं। डॉक्टर्स कहते हैं कि प्रसव के बाद हाइपर थायराइड (delivery ke baad hyperthyroidism) का इलाज दवाइयों से नहीं किया जाता और ज्यादातर मामलों में यह एक साल के अंदर अपने आप ठीक हो जाता है। वहीं अगर डिलीवरी के बाद हाइपो थायराइड (delivery ke baad hypothyroidism) की समस्या ज्यादा है तो डॉक्टर थायराइड की जांच के नतीजों के आधार पर उपचार करते हैं।

    क्या डिलीवरी के बाद थायराइड की समस्या से मां के स्तनों में दूध बनने की प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ता है?

    डिलीवरी के बाद हाइपो थायराइड (delivery ke baad hypothyroidism) होने की स्थिति में पीड़ित महिला के स्तनों में दूध बनना कम हो जाता है, क्योंकि मां के स्तनों में दूध बनने की प्रक्रिया में थायराइड हार्मोनों का अहम योगदान होता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि जब मां के खून में थायराइड हार्मोन की मात्रा कम होती है तो इससे दूध नहीं बन पाता है, इसीलिए डिलीवरी के बाद हाइपो थायराइड (delivery ke baad hypothyroidism) होने की स्थिति में थायरॉक्सिन हार्मोन (thyroxine hormone) के स्तर को नियंत्रण में रखा जाता है। इसके साथ ही डॉक्टर बताते हैं कि प्रसव के बाद हाइपर थायराइड (delivery ke baad hyperthyroidism) होने की स्थिति में मां के स्तनों में दूध बनने की प्रक्रिया तेज़ हो जाती है और स्तनों में ज्यादा दूध बनने लगता है। हालांकि प्रसव के बाद हाइपर थायराइड (delivery ke baad hyperthyroidism) का स्तर अनियंत्रित होने पर डॉक्टर ऑपरेशन या रेडियोएक्टिव थेरेपी की सलाह दे सकते हैं।

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    क्या प्रसव के बाद थायराइड की गोलियां लेना स्तनपान और शिशु के लिए सुरक्षित है?

    विशेषज्ञ कहते हैं कि आमतौर पर प्रसव के बाद हाइपो थायराइड (delivery ke baad hypothyroidism) के लिए दी जाने वाली गोलियों का असर स्तनपान पर नहीं होता है। मां के खून में भी दवा की कुछ ही मात्रा पहुंचती है, लेकिन इससे शिशु की सेहत पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। इसीलिए डॉक्टर स्तनपान के दौरान हाइपो थायराइड की गोलियां लेना सुरक्षित मानते हैं। वहीं डिलीवरी के बाद हाइपर थायराइड (delivery ke baad hyperthyroidism) की समस्या के लिए मां को आमतौर पर कोई दवाई नहीं दी जाती, क्योंकि कई मामलों में प्रसवोत्तर हाइपर थायराइड की समस्या कुछ समय के बाद सामान्य हो जाती है। हालांकि अगर किसी महिला की शरीर में प्रसव के बाद हाइपर थायराइड का स्तर असामान्य है तो उन्हें अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर थायराइड के स्तर पर नियंत्रण पाने के लिए कुछ गोलियां दे सकते हैं। इन गोलियों को लेते समय शिशु को स्तनपान कराना उसके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसके अलावा डिलीवरी के बाद हाइपर थायराइड (delivery ke baad hyperthyroidism) ज्यादा होने पर डॉक्टर आपको अॉपरेशन या रेडियोएक्टिव थेरेपी की सलाह दे सकते हैं। इनसे स्तनपान और शिशु के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

    डिलीवरी के बाद थायराइड होने पर क्या सावधानियां बरतें?

    • अगर डिलीवरी की बाद थायराइड (delivery ke baad thyroid) की समस्या है तो डॉक्टर की सलाह पर ही दवाइयां लें।
    • नियमित रूप से अपने थायराइड के स्तर की जांच कराएं।
    • प्रसव के बाद हाइपो थायराइड (delivery ke baad hypothyroidism) की दवाइयों से आपको एलर्जी हो सकती है, जिनमें त्वचा में खुजली, आंखों में जलन, बाल झड़ना आदि आम है। अगर दवाइयों से आपको इनमें से किसी प्रकार की एलर्जी हो रही है तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
    • डिलीवरी के बाद थायराइड (delivery ke baad thyroid) को नियंत्रण में रखने के लिए अपने दिनचर्या में सुधार करें।
    • प्रसवोत्तर थायराइड होने की स्थिति में डॉक्टर की सलाह से संतुलित भोजन लें।
    • प्रसव के बाद थायराइड (delivery ke baad thyroid) है तो तनाव से दूर रहें।
    प्रसव के बाद महिलाओं में थायरायड हार्मोन का स्तर बढ़ने या घटने से उन्हें कई प्रकार की समस्याएं, जैसे तनाव, चिड़चिड़ापन, थकान आदि हो सकती हैं, इसीलिए अपनी थायराइड की समस्या की निगरानी बेहद जरूरी है। इस ब्लॉग में प्रसवोत्तर थायराइड की समस्या से जुड़ी सभी जानकारी दी गई है। डिलीवरी के बाद थायराइड (delivery ke baad thyroid) (Thyroid Problem in Pregnancy) की समस्या से जूझ रहीं महिलाओं को इससे जुड़ी किसी अन्य जानकारी के लिए अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

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